

सोनभद्र। विंध्य एक्सप्रेस-वे और जल, जंगल व जमीन के सवाल को लेकर चतरा ब्लॉक में रविवार को किसानों और आदिवासियों ने जोरदार हुंकार भरी। किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा की बैठक में बड़ी संख्या में पहुंचे किसान पुत्रों और आदिवासी परिवारों ने अपनी जमीन, जंगल और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष का संकल्प लिया। बैठक में मोर्चा के संयोजक संदीप मिश्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “सोनभद्र का एक भी किसान और आदिवासी एक्सप्रेस-वे के लिए अपनी जमीन नहीं चाहता। विकास के नाम पर किसानों और आदिवासियों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में किसानों और आदिवासी परिवारों ने अपनी समस्याएं और आशंकाएं मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल के सामने रखीं। उनकी बात सुनने के बाद संदीप मिश्र ने कहा कि जो सरकारें कभी अन्नदाताओं की आय दोगुनी करने का दावा करती थीं, आज वही किसानों की जमीन अधिग्रहित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे से आम जनता की अपेक्षा कॉरपोरेट हितों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए करीब 2019 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि प्रभावित होने की बात सामने आ रही है, वहीं पीएसपी सहित अन्य निर्माण कार्यों के कारण सोनभद्र की प्राकृतिक धरोहर मानी जाने वाली विंध्य पर्वतमाला और उसके जंगलों पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
जल, जंगल और जमीन की कीमत पर नहीं चाहिए विकास
संदीप मिश्र ने कहा कि विकास का विरोध नहीं है, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार नहीं किया जा सकता जो किसानों की उपजाऊ जमीन, आदिवासियों के अधिकार और जंगलों के अस्तित्व को खत्म कर दे। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के एलाइनमेंट पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए
क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए पहले पटवध से पोखरिया मार्ग सहित जरूरी संपर्क मार्गों का निर्माण कराया जाए। साथ ही विंध्य पर्वतमाला क्षेत्र में पीढ़ियों से निवास कर रहे आदिवासी परिवारों को वनाधिकार कानून के तहत तत्काल पट्टे आवंटित किए जाएं। मिश्र ने कहा कि “पहले आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित किए जाएं, उसके बाद किसी विकास परियोजना पर चर्चा हो। जल, जंगल और जमीन को उजाड़कर विकास का ढोल पीटना जनता के साथ न्याय नहीं है।”
किसानों की दो टूक –जमीन नहीं देंगे
बैठक में किसानों ने एक स्वर में प्रस्तावित परियोजना के लिए जमीन देने से इनकार किया। किसान चेतन ओझा ने कहा, “जमीन हमारी माता है, और हमें अपनी माता का सौदा करना नहीं आता।” धीरज पांडेय ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में जमीन नहीं दी जाएगी। प्रेमनाथ मौर्य ने भी किसानों के संघर्ष में साथ रहने का संकल्प लेते हुए कहा कि जमीन बचाने की लड़ाई जारी रहेगी।
रामसूरत खरवार ने कहा कि आदिवासी समाज का अस्तित्व जल, जंगल और जमीन से जुड़ा है। उन्होंने कहा, “हम अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए जान लगा देंगे, लेकिन इन्हें समाप्त नहीं होने देंगे। बैठक में उपस्थित किसानों और आदिवासियों ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने और अपने अधिकारों की लड़ाई तेज करने का संकल्प लिया। बैठक में शत्रुधन बिंद, आकाश चौहान, रवि शुक्ल, चेतन ओझा, विजय, अरविंद, शंकर, नगेंद्र लाकरा, जितेंद्र लाकरा, प्रमोद तिर्की, विजय पटेल, राकेश, राजेश, संजय बियार, दिनेश चेरो, अगद पटेल, रामसजीवन पटेल, दशरथ मौर्य सहित सैकड़ों किसान और आदिवासी मौजूद रहे।
